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वसुमती योग कैलकुलेटर

वसुमती योग — वसुधा (धरती) का योग — बढ़ती हुई स्थिर संपदा का सूचक है। यह शुभ ग्रहों के उपचय भावों (3, 6, 10, 11) में स्थित होने से बनता है।

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वसुमती योग कैलकुलेटर के बारे में

उपचय का अर्थ ही है वृद्धि — इन भावों में बैठे ग्रह समय के साथ बढ़ते फल देते हैं। शुभ ग्रह जब लग्न या चंद्र से उपचयों में हों, तो धन-संचय की प्रवृत्ति धरती-सी धैर्यवान और निरंतर होती है।

FeelAstro का कैलकुलेटर उपचय-स्थित शुभ ग्रहों की जाँच करके योग की उपस्थिति बताता है — जितने अधिक शुभ ग्रह उपचय में, योग उतना प्रबल।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वसुमती योग क्या है?

शुभ ग्रहों (गुरु, शुक्र, शुभ बुध-चंद्र) के उपचय भावों — 3, 6, 10, 11 — में स्थित होने से बनने वाला योग, जो निरंतर बढ़ने वाली संपदा देता है।

उपचय भाव क्या होते हैं?

3, 6, 10 और 11 — वृद्धि के भाव। यहाँ स्थित ग्रह समय के साथ बलवान होते जाते हैं; पाप ग्रह भी उपचय में क्रमशः अनुकूल फल देने लगते हैं।

वसुमती और धन योग में अंतर?

धन योग भाव-स्वामियों के संबंध से बनते हैं (संरचनात्मक), वसुमती शुभ ग्रहों की उपचय-स्थिति से (स्थितिगत) — यह "कमाई की चाल" दिखाता है: धीमी, स्थिर, चक्रवृद्धि-सी।

योग कितने ग्रहों से प्रबल माना जाता है?

एक शुभ ग्रह से आरंभ, दो-तीन से प्रबल — तीनों-चारों शुभ ग्रह उपचय में हों तो जातक "वसुमान" (धनवान) कहा गया है।

फल कब मिलता है?

उपचय-स्थित शुभ ग्रहों की दशाओं में संचय-चरण तीव्र होते हैं; स्वभावतः यह योग युवावस्था से उत्तरार्ध तक बढ़ता ही जाता है।