धर्म-कर्माधिपति योग कैलकुलेटर
धर्म-कर्माधिपति योग शास्त्रों के सर्वश्रेष्ठ राज योगों में गिना जाता है। यह नवमेश (धर्मेश — भाग्य का स्वामी) और दशमेश (कर्मेश — कर्म का स्वामी) के परस्पर संबंध से बनता है।
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धर्म-कर्माधिपति योग कैलकुलेटर के बारे में
नवम सर्वोत्तम त्रिकोण है और दशम सर्वोत्तम केंद्र — इनके स्वामियों की युति, परस्पर दृष्टि या स्थान-विनिमय भाग्य और कर्म को एक धारा में बहा देता है: व्यक्ति जो करता है, भाग्य उसी में साथ देता है।
FeelAstro का कैलकुलेटर नवमेश-दशमेश के संबंध की जाँच करके योग की उपस्थिति और दोनों स्वामियों का बल-विश्लेषण देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
धर्म-कर्माधिपति योग क्या है?
नवमेश और दशमेश के परस्पर संबंध (युति, दृष्टि या विनिमय) से बनने वाला श्रेष्ठ राज योग — भाग्य और कर्म का संगम, जो उच्च पद और स्थायी सफलता देता है।
यह योग इतना श्रेष्ठ क्यों माना जाता है?
केंद्र (कर्म) और त्रिकोण (भाग्य) के सर्वोत्तम स्वामियों का मेल "राज योग" की मूल परिभाषा है — पराशर के अनुसार केंद्रेश-त्रिकोणेश संबंध ही राज योग का बीज है, और 9-10 का मेल उसका शिखर।
योग किन रूपों में बन सकता है?
तीन मुख्य रूप: दोनों स्वामियों की युति (सर्वाधिक प्रबल), परस्पर दृष्टि, या स्थान-विनिमय (नवमेश दशम में और दशमेश नवम में)।
इस योग का फल क्या है?
करियर में उच्च पद, नीति-सम्मत सफलता, गुरुजन-कृपा और समाज में धर्मात्मा की छवि — कर्म और भाग्य एक-दूसरे को बल देते हैं।
फल कब मिलता है?
नवमेश या दशमेश की दशा-अंतर्दशा में योग खुलता है — प्रायः करियर की निर्णायक छलांग इसी काल में लगती है।